Hindi Sex Kahani


मैं राजस्थान का रहने वाला हु. लेकिन अभी दिल्ली के एक कॉलेज से ग्रेजेशन कर रहा हु. मेरी उम्र 23 साल है और मेरे लंड का साइज़ कोई 7 इंच है. आज जो स्टोरी मैं आपको सुनाने जा रहा हु, वो मेरी भाभी जी की है और बिलकुल सच्ची है. तो मैं अब कहानी शुरू करता हु.

ये कहानी उस समय की है, जब मैं कॉलेज के फर्स्ट इयर में था. मैं जहाँ पर किराये पर रहता था, वहां पर दो पोर्शन थे. उनके घर में अंकल, आंटी, भैया, भाभी और उनकी एक बहन थे. उनकी बहन कि शादी हो चुकी थी, लेकिन रह वहीँ रही थी. अंकल सरकारी जॉब में थे. उनके बेटे को मैं भाई बोलता था. भाई एक प्राइवेट जॉब में थे. उनके शादी ३ महीने पहले ही हुई थी. भाई दिन को काम पर जाते थे और शाम को घर आ जाते थे. उस का नाम इरुमा था. वो देखने में बहुत सेक्सी थी. एकदम फेयर कलर, फिगर होगा कोई 28-36-34. वो घर में आते ही छा गए. अंकल आंटी और सभी घर वालो का बहुत धयान रखती थी. मैं जब भी उनको देखता, तो सोचता था, कि भाई कितने लक्की है, जो भाभी को हर रात चोदते है. जल्दी ही मैं और वोअच्छे दोस्त बन गये और काफी फ्रेंक भी हो गए. हम दोनों हंसी मजाक भी करते थे और अपनी बातें भी शेयर करते थे. मैं भी उस से काफी मजाक करने लगा था.

एक दिन भाभी जी अपने कमरे से मेकउप कर के बड़ी बनठन के बाहर निकली. मैं उस समय टीवी देख रहा था. तो भाभी जी आई और कहा, देवर जी, मैं कैसी लग रही हु? भाभी जी ने ब्लू सलवार – कमीज़ पहना हुआ था. मैंने उनको देख कर बोला, सच बताऊ.. माइंड तो नहीं करोगी? उन्होंने कहा – नहीं. मैंने फिर रिप्लाई किया, आप बहुत सेक्सी लग रही हो. वो शर्मा गयी और कहा, बहुत बदमाश हो तुम. और फिर वो मुस्कुराते हुए चली गयी. मैंने उनको चोदना चाहता था. लेकिन कभी हिम्मत ही नहीं हुई थी. लेकिन मेरा ये सपना पूरा हो जाएगा, ये कभी सोचा ना था. एक दिन मैं कॉलेज से घर आया, तो देखा सब घर वाले कहीं बाहर जाने के लिए तैयार है. भाभी जी भी. पूछने पर पता चला, कि उनके गाँव में उनके रिश्तेदार की तबियत बहुत नाजुक है. अंकल और भैया ने 10 दिन की छुटिया ले ली थी. मैंने स्टडी कि वजह से घर जाने से इनकार कर दिया.

अंकल आंटी ने कहा, भाभी जी घर पर ही रुक सकती है. उनका कुछ खास मन नहीं था जाने का. आंटी ने भाभी को कहा – बहु, तू घर का ख्याल अच्छे से रखना. भाभी ने ओके कह दिया. सब लोग कार से भैया की कार से गाँव चले गए. घर में अब हम दोनों ही थे. ४ दिन यूहि गुजर गए. मैंने महसूस किया, कि भाभी कुछ उदास सी रहने लगी थी. पांचवे दिन, मैं कॉलेज से घर आया. भाभी जी ने मुझे खाना बना कर दिया और फिर वो नहाने चली गयी.

फिर जाके मैंने खाना खाया और कमरे में आ गया. मैं बेड पर लेट गया था. भाभी जी थोड़ी देर में आई. उन्होंने पिंक कलर की सलवार कमीज़ पहनी हुई थी और काफी प्यारी लग रही थी. मैंने कहा, आओ ना अन्दर. वो अन्दर आई और एकदम डोर लॉक कर दिया. मुझे कुछ अजीब लगा. लेकिन मैंने इग्नोर कर दिया. वो आ कर बेड पर बैठ गयी. मैं लेटा हुआ था. फिर हम बातें करने लगे थे. फिर भाभी जी मेरे साथ ही लेट गयी. मुझे अब भाभी जी की नीयत पर शक होने लगा. भाभी जी ने मेरे सीने पर हाथ रखा, तो मेरी हार्ट बीट तेज होने लगी. मैंने कहा, भाभी जी – क्या कर रही हो? तो भाभी जी ने बोला – मैं जानती हु, कि तुम मुझे चोदना चाहते हो. लेकिन मैं आज खुद तुमसे चुदवाने आई हु. मैंने बहुत प्यासी हु. प्लीज मुझे चोद दो.

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मैं अन्दर ही अन्दर बहुत खुश हुआ. तभी वो जी मुझसे लिपट गयी और मेरे होठो को चूसने लगी. मैं भी पागलो की तरह से उनके गुलाबी होठो को चूस रहा था. मैंने जल्दी से अपने सारे कपडे उतारे और नंगा हो गया. मेरा पूरा लंड फुल कर टाइट हो गया था. उन्होंने जल्दी से अपनी कमीज़ उतारी, तो मैंने झट से उनका नाडा खीच दिया और उनके सलवार को उतार फेंका. अब वो सिर्फ ब्लैक ब्रा और पेंटी में रह गयी थी. मैंने उनको भी उतार फेंका. भाभी जी के ऊपर चढ़ गया और उनके लिप्स, नैक और पुरे जिस्म को चूमने लगा और चाटने लगा. फिर मैंने भाभी जी के मुमे को मुह में ले लिया और चूसने लगा. वो तड़प उठी. वो सिस्कारिया भर रही थी उम्म्मम्म उम्म्मम्म अहहाह अहहाह जोर से चुसो… ह्म्म्मम्म और जोर से चुसो ना मेरी जान… फिर मैंने उसकी टांगो को फैलाया और देखा, कि उनकी चूत एकदम साफ़ थी. उनकी गुलाबी चूत को देख कर मेरे मुह पानी आ गया और मैंने उनकी चूत को चूम लिया. फिर मैं उनकी चूत को हाथ से सहलाने लगा और वो मेरे लंड को सहला रही थी.

फिर भाभी जी बोली – अब डाल भी दो ना प्लीज. मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और रगड़ने लगा. भाभी जी और भी तड़पने लगी. वो बोल रही थी चोदो ना, चोदो ना मुझे… बहुत प्यासी हु मैं. प्लीज देवर जी. अपनी भाभी की चूत की आग को बुझा दो. फिर मैंने लंड को चूत के होल पर रखा और कंधो को पकड़ कर कस कर धक्का मारा. मेरा आधा लंड घुस गया और वो चीख पड़ी, ऊऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ मर गयी. अआरम से करो ना. फिर मैंने धीरे – धीरे धक्के मारने शुरू किया और फिर एक जोरदार धक्का मारा और मेरा पूरा लंड पेल दिया उसके अन्दर. उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया और मैंने अपनी स्पीड को आहिस्ते से बढ़ाना शुरू किया . अब मैं घपा – घप उसकी ठुकाई कर रहा था. भाभी को बहुत मजा आ रहा था. वो अपनी गांड को उठा – उठा कर चुदवा रही थी.

मैंने 20 मिनट तक भाभी की ताबड़तोड़ चुदाई की और आखिर में उनकी चूत में ही झड गया. फिर मैं उसके ऊपर ही ढेर हो गया और हाफ्ने लगा. भाभी जी भी इस बीच 3 – 4 बार झड़ चुकी थी. नेक्स्ट ५ दिन में, मैंने उसको इतना चोदा, जितना भाई ने उनको 3 महीने में नहीं चोदा था. वो मेरे लंड कि दीवानी हो गयी थी. आज भी अगर मुझे मौका मिलता है, तो भाभी को चोदने से बाज नहीं आता हु मैं. उनके 3 बच्चे है, लेकिन ये नहीं मालूम है, कि वो मेरे है या भाई के? तो दोस्तों, आप को मेरी कहानी कैसी लगी, प्लीज अपने कमेंट में जरुर बताना.