Hindi Sex Kahani

मेरा नाम अदिति भारद्वाज (उम्र २०) है। 
मैं मुंबई की रहने वाली हुँ। मेरी सोच एकदम मॉडर्न किसम की है। मैं लाइफ के मज़े खुलकर लेना पसंद करती हुँ। इसलिए मेरे कॉलेज में काफ़ी लड़के मेरी चूत को बजाने के मौके ढूँढ़ते रहते हैं। वैसे उन बेचारे लकड़ों की कोई गलती नहीं है।

मैं ही अपनी हरकतों से उन लोगों के लौड़े की आग को भड़काती हुँ। मैं टाइट लेग्गिंग्स पहनकर अपनी मोटी गाँड़ मटकाते हुए चलती हुँ जिसे देखकर लड़के अपने लौड़े पर हाथ रख देते हैं।

कॉलेज में मैं आगे झुककर बैठती हुँ ताकि लड़कों को मेरी पैंटी की झलक दिख जाए। जब मैं तुरंत पीछे मुड़कर देखती हुँ, तब सारे लड़के मेरी गाँड़ को ही ताड़ते नज़र आते हैं।

एक बार कॉलेज की परीक्षा में मेरे पीछे बैठने वाला लड़का चिट लेकर आया था। मुझे किसी भी तरह उस लड़के को मनाना था कि वह मुझे भी चिट देदें ताकि मैं उस पेपर में पास हो जाऊ।

मैंने उस लड़के को क्लास के बाहर ले जाकर उससे अनुरोध किया, लेकिन उस कमीने लड़के ने एक शर्त रखी। उसने कहा कि अगर मैं उसे परीक्षा के वक़्त मेरी गाँड़ छूने देती हुँ तो ही वह मुझे कॉपी करने चिट देगा। मजबूरी में मैंने उसे हाँ बोल दिया।

परीक्षा के वक़्त उस लड़के ने मेरे हाथ में चिट थमा दिया और मज़े करने लगा। मैं आगे झुककर पेपर लिख रही थी और वह लड़का पीछे से मेरी लेग्गिंग्स के अंदर अपनी हथेली घुसाकर मेरी गाँड़ छूने लगा।

उसने मेरी पैंटी के अंदर अपनी उँगली घुसाकर मेरी गाँड़ की दरार को रगड़ना शुरू कर दिया। मेरी चूत में उत्तेजना की वजह से पानी छूटने लगा था। सिसकियाँ लेकर मैंने कैसे भी करके पेपर को पूरा लिख दिया था।

परीक्षा ख़तम होने के बाद वह लड़का मुझे बाहर आकर मिला और मुझे एक ऑफर दिया। उसके पास अगले दिन होने वाली परीक्षा के सवाल थे।

उसने मुझसे कहा कि अगर मैं उसे मेरी चुदाई करने दूँगी, तो मुझे वह अगले दिन होने वाली परीक्षा का पेपर दे देगा।

मुझे उसकी बातों पर बिलकुल विश्वास नहीं हो रहा था, लेकिन परीक्षा में अच्छे मार्क्स लाने की लालच के मारे मैंने उसके ऑफर को स्वीकार कर लिया।

वह मुझे अपने घर लेकर गया। उसके माँ-पिताजी ऑफिस से शाम को घर लौटते थे, इसलिए उसे किसी बात की चिंता नहीं थी। उसके घर पहुँचने के बाद उस लड़के ने मुझे एक झटका दिया।

उसने कहा कि उसका दोस्त भी मेरी चुदाई करने आ रहा है। मैंने एक साथ दो लौड़े कभी नहीं लिए थे, लेकिन फिर भी मुझे बहुत मज़ा आने लगा। मज़े के साथ-साथ कल का पेपर भी मिलने वाला था। थोड़ी देर बाद उसका दोस्त घर पहुँच गया।

 

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उसने मुझे अगले दिन वाले परीक्षा का पेपर थमा दिया। हम तीनों उस लड़के के माँ-पिताजी के कमरे में चले गए। मैं बिस्तर पर लेट गई और देखा कि वह दोनों लड़के अपने कपड़े उतार रहे थे। शायद उन दोनों को मेरी चुदाई करने की बहुत जल्दी थी।

दोनों लड़के नंगे होकर अपने लटकते हुए लौड़े लेकर बिस्तर पर बैठ गए। एक लड़के ने मेरे होठों की चुम्मियाँ लेनी शुरू कर दी और दूसरा मेरी लेग्गिंग उतारने लगा। मेरी लेग्गिंग और पैंटी उतारकर मेरी चूत में उँगली घुसाने लगा।

दोनों लड़के मुझ पर टूट पड़े थे। पहला लड़का चुम्मियाँ लेते हुए मेरी टी-शर्त के अंदर हाथ डालकर चूचियाँ दबा रहा था। दूसरा लड़का मेरी चूत चाटने लगा और अपनी उँगलियों को मेरी गाँड़ की छेद के अंदर घुसाकर अंदर-बाहर करने लगा।

पहले लड़के ने मेरी टी-शर्ट उतारकर मेरी चूचियाँ अपने हाथों में दबोचकर उन्हें मसल रहा था। मैं ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी थी। पहले लड़के ने मेरी निप्पल को अपने उँगली से खींचकर मेरी चीख़ें निकालने लगा।

मेरी चीख़ें सुनकर दूसरा लड़का जोश में आ गया और उसने मेरी गाँड़ की छेद में अपनी ज़ुबान घुसा दी। पहला लड़का मेरी छाती पर बैठ गया और उसने अपने लौड़े को मेरी मुँह के अंदर घुसा दिया।

उसने अपने जाघों से मेरे चेहरे को दबा दिया ताकि मेरी गर्दन न हिले। मैं उसके लौड़े को अच्छी तरह से चाटने लगी। उसने अपनी गोटियों को भी मेरे मुँह के अंदर भर दिया था। वह लड़का मेरी चूचियों को दबाकर अपनी गर्मी निकाल रहा था।

दूसरा लड़का मेरी चूत को फैलाकर चाट रहा था। उसने अपनी दो उँगलियों को मेरी गाँड़ की छेद के अंदर घुसा दिया और उन्हें सूँघते हुए मेरी चूत को चाट रहा था। मेरी चूत से पानी निकलने लगा था।

उस लड़के ने अपनी ज़ुबान से मेरी चूत को चोदना शुरू किया। उसने मेरे काँपते हुए पैरों को पकड़ लिया और मेरी चूत से चिपचिपा पानी निकालने लगा। थोड़ी देर के बाद, पहला लड़का मेरी चूत के पास चला गया।

उसने अपने गीले लौड़े को मेरी चूत के अंदर धीरे से घुसाकर धक्के मारने लगा। मेरे पैरों को फैलाकर उसने अपना लौड़ा मेरी चूत के अंदर तक घुसाकर मुझे चोदने लगा। मेरी चूत में उसका लौड़ा बड़ी आसानी से अंदर फिसल रहा था।

ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारकर वह थोड़ी देर रुक जाता और फिर धीरे से धक्के मारते हुए अपनी गति को फिर से बढ़ाता था।


दूसरा लड़का मेरी छाती पर आकर बैठ गया।

उसने अपनी उँगलियों को मेरे मुँह के अंदर घुसाकर मुझे उनका स्वाद चटाया। उसका लौड़ा भी तनकर खड़ा हो गया था। उसने मेरी मुँह के अंदर थूक मारकर मेरी चुम्मियाँ लेने लगा। फिर उसने अपना लौड़ा मेरी मुँह के अंदर घुसा दिया।

अपने लौड़े को मेरे मुँह के अंदर-बाहर घुसाते हुए उसने मेरी चूचियाँ दबानी शुरू कर दी। कुछ देर बाद, पहले लड़के ने मुझे चोदना बंद किया और मुझे घोड़ी बनाकर बिस्तर पर लेटा दिया। अब मेरी चुदाई करने की बारी थी दूसरे लड़के की।

दूसरा लड़का मेरी चूत में अपने लौड़े को घुसाकर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। उसने अपनी उँगलियों से मेरी गाँड़ की छेद को चौड़ा कर दिया था। मेरी गाँड़ की छेद के अंदर थूक मारकर वह अपनी उँगली घुसाने लगा।

कुछ देर बाद, जोश में आकर उसने मेरी कमर पकड़ी और मुझे अपने लौड़े पर ज़ोर-ज़ोर से पटकना शुरू कर दिया था। मेरी चीख़ों को रोकने के लिए पहले लड़के ने मेरे मुँह में अपना लौड़ा भर दिया था।

मेरी गालों को पकड़कर मेरी मुँह के अंदर वह अपना लौड़ा घुसा रहा था। उसने भी मेरी गाँड़ की छेद के अंदर अपनी उँगलियाँ घुसाई और उनका स्वाद मुझे चटाया। मेरे बालों को खींचकर वह मेरी मुँह के अंदर अपनी गोटियाँ घुसाने लगा।

ऐसे मेरी चुदाई करते दोनों थोड़ी देर के लिए रुक गए थे। बाद में, पहले लड़के ने मुझे अपने ऊपर चढ़ाकर लेटा दिया। उसने अपने लौड़े को मेरी चूत की दरार में रगड़कर अंदर घुसा दिया। वह लड़का मुझे अपने लौड़े पर उछालने लगा था।

दूसरे लड़के ने पीछे से मेरी गाँड़ की छेद में अपना लौड़ा गुसा दिया। दोनों अब धीरे-धीरे करके मेरी चुदाई करने लगे थे। पहला लड़का मेरी चूचियों को पकड़कर दबा रहा था और दूसरा लड़का मेरी होठों की चुम्मियाँ ले रहा था।

दोनों लड़के मेरी ज़ोर-ज़ोर से चुदाई करने लगे थे। मैं मस्त और गरम होकर उन दोनों के लौडों पर उछल रही थी। मैं पहले लड़के के ऊपर लेट गई और दूसरा लड़का मुझपर लेट गया और चुदाई को जारी रखा।

कुछ देर बाद, दोनों लड़के मेरे मुँह के सामने अपना लौड़ा लेकर खड़े हो गए थे। मैं बिस्तर पर उनके बिच बैठकर उनका लौड़ा हिला रही थी। दोनों ने अपने लौड़े का पानी मेरे चेहरे पर निकाल दिया।

मेरी चूचियाँ दबाकर मेरे चेहरे को साफ़ किया और फिर मेरे साथ बिस्तर पर लेट गए। हम तीनों इतने थक गए थे कि वही एक दूसरे से चिपककर थोड़ी देर लेटे रहें।